क्या किसी को नज़र लग सकती हैं

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 क्या किसी को नज़र लग सकती हैं 🥀* *🗒Part- 1* ✍🏼 मसलके आला हज़रत ग्रुप की जानिब से इस चार ह़िस्सों (4 Part) की पोस्ट में आप पढ़े कि बद नज़री क्या हैं बद नज़र कैसे लगती हैं बद नज़री के क्या क्या नुक़्सानात हैं और बद नज़री का इलाज क्या हैं इन्सानी जिस्म और दुसरी चीज़ों को नज़र लगना, इससे बचने की तदबीरें करना, इसका इलाज करना शरअ़न साबित हैं, लेकिन याद रहे कि किसी की नज़र लगना अलग चीज़ हैं और किसी को मन्हूस समझना और चीज़! आजकल हमारे मुआशरे में कुछ ज़्यादा (दुनियावी तालीम के एतिबार से) पढ़े लिखे लोग नज़र को ह़क़ नही समझते और कहते हैं कि "ये सब मौलाना व आमिल लोगों की फैलाई हुई बातें हैं जिससे उनका गुज़ारा हो सके मगर ऐसा बिल्कुल भी नही हैं बल्कि सच तो ये हैं कि "नज़र लगना ह़क़ हैं" और कुरआन व अह़ादीस से भी साबित हैं तो आइए अब कुरआन व अह़ादीस की रौशनी में देखते हैं कि नज़र क्या होती हैं! ➡ह़ज़रते सय्यिदुना याकूब अ़लैहिस्सलाम के दस बेटे बहुत ख़ुबसूरत और बहुत बा कमाल थे, मिस्र के चार दरवाज़े थे, जब दस बेटे मिस्र रवाना होने लगे तो आप अ़लैहिस्सलाम को ये ख़त़रा मह़सूस हुआ कि अगर दस के दस एक दरवाज़े से दाख़िल हुए तो इन पर देखने वालों की नज़र लग जाएगी इसलिए इर्शाद फ़रमाया ➡तर्जमा ए कन्ज़ुल ईमान "ऐं मेरे बेटो एक दरवाज़े से न दाख़िल होना और जुदा जुदा दरवाज़ों से जाना"! *📖(पारह-13, सूरए यूसुफ़, आयत-67)* 📜🔸वज़ाहत🔸📜 ➡ह़ज़रते मुफ़्ती अह़मद यार ख़ान अ़लैहिर्रह़मां इस आयत के तह़त लिखते हैं "इससे मालूम हुआ कि नज़र ह़क़ हैं और इसमें असर हैं! ये भी मालूम हुआ कि नज़रे बद से बचने की तदबीर करना सुन्नते पैग़म्बर हैं"! *📚(नूरुल इ़रफ़ान, सफ़ह़ा-387)* 📜🔸वज़ाहत🔸📜 ➡ह़ज़रते अ़ल्लामा मौलाना सय्यिद मुह़म्मद नई़मुद्दीन मुरादाबादी अ़लैहिर्रह़मां इस आयत के तह़त लिखते हैं "ताकि नज़रे बद से मह़फ़ूज़ रहो! बुख़ारी व मुस्लिम की ह़दीस में हैं कि नज़र ह़क़ हैं! पहली मर्तबा ह़ज़रते याकूब अ़लैहिस्सलाम ने ये नही फ़रमाया था इसलिए कि उस वक़्त तक कोई ये न जानता था कि ये सब भाई और एक बाप की औलाद हैं लेकिन अब चूंकि जान चुके थे इसलिए नज़र हो जाने का अन्देशा था, इसलिए आपने अलग अलग हो कर दाख़िल होने का हुक्म दिया! इससे मालूम हुआ कि आफ़तों और मुसीबतों से दफ़्अ़ की तदबीर और मुनासिब एह़तियात़ें अम्बियाए किराम अ़लैहिमुस्सलातो वस्सलाम का त़रीक़ा हैं और इसके साथ ही आपने मुआमला अल्लाह तआ़ला को तफ़्वीज़ कर दिया कि बा वुजूद एह़तियात़ों के तवक्कुल व एतिमाद अल्लाह तआ़ला पर हैं अपनी तदबीर पर भरोसा नही"! *📚(ख़ज़ाइनुल इ़रफ़ान, सफ़ह़ा-654)* ⏩जारी हैं........ 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴* https://chat.whatsapp.com/BlTnmJKrHakLQ0Y3Q9Q1KC

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

क्या किसी को नज़र लग सकती हैं

क्या किसी को नज़र लग सकती हैं